भारत में LPG गैस संकट की खबरों ने इन दिनों आम लोगों से लेकर होटल-रेस्टोरेंट कारोबार तक चिंता बढ़ा दी है। कई राज्यों में घरेलू और कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने लगी है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें दिखाई दे रही हैं और कई जगहों पर सिलेंडर मिलने में कई दिनों की देरी हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में LPG गैस संकट की बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध और वैश्विक सप्लाई चेन का प्रभावित होना है।
भारत को हर साल कितनी LPG की जरूरत होती है?
भारत दुनिया के सबसे बड़े LPG उपभोक्ता देशों में से एक है। देश में हर साल लगभग 33 मिलियन मीट्रिक टन LPG की खपत होती है।
अगर इसे घरेलू गैस सिलेंडर के हिसाब से देखें तो यह करीब 235 करोड़ सिलेंडर के बराबर है। यानी देश में रोजाना लगभग 64 लाख सिलेंडर इस्तेमाल होते हैं।
- लगभग 88% LPG घरों में खाना बनाने के लिए उपयोग होती है
- करीब 12% गैस होटल, रेस्टोरेंट और इंडस्ट्री में इस्तेमाल होती है
भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 60% LPG विदेशों से आयात करता है। इसी वजह से जब अंतरराष्ट्रीय सप्लाई प्रभावित होती है तो भारत में LPG गैस संकट जैसी स्थिति बन सकती है।
कई राज्यों में गैस की किल्लत क्यों बढ़ रही है?
देश के अलग-अलग हिस्सों से गैस सिलेंडर की कमी की खबरें सामने आ रही हैं। कई जगहों पर कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई बंद या सीमित हो गई है।
मध्य प्रदेश
कॉमर्शियल गैस सिलेंडर न मिलने से होटल और रेस्टोरेंट पर संकट बढ़ गया है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें लग रही हैं और शादी वाले घरों में भी परेशानी देखी जा रही है।
राजस्थान
जयपुर में कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित है। कई जगहों पर 1911 रुपये का सिलेंडर 2500 रुपये तक में बिकने की खबरें सामने आई हैं।
उत्तर प्रदेश
बुकिंग के 4–5 दिन बाद भी सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। कुछ जिलों में पुलिस सुरक्षा में गैस सिलेंडर बांटे जा रहे हैं।
बिहार
कॉमर्शियल सिलेंडर की बुकिंग कई जगहों पर तीन दिन से बंद बताई जा रही है, जिससे होटल और रेस्टोरेंट प्रभावित हो रहे हैं।
महाराष्ट्र और कर्नाटक
मुंबई-पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों में गैस की कमी के कारण कई होटल-रेस्टोरेंट सीमित सेवा दे रहे हैं। कुछ जगहों पर सिलेंडर की कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आई हैं।
इन घटनाओं से साफ है कि भारत में LPG गैस संकट का असर धीरे-धीरे कई राज्यों में दिखाई देने लगा है।
LPG क्या होती है और कैसे बनती है?
LPG यानी लिक्विड पेट्रोलियम गैस मुख्य रूप से दो गैसों का मिश्रण होती है:
- प्रोपेन
- ब्यूटेन
यह गैस सीधे जमीन से नहीं निकलती बल्कि पेट्रोलियम उत्पादों की प्रोसेसिंग के दौरान बनने वाला बाय-प्रोडक्ट होती है।
LPG बनने के दो मुख्य तरीके
1. तेल और गैस के कुओं से
जब जमीन से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस निकाली जाती है तो उसके साथ प्रोपेन और ब्यूटेन गैस भी निकलती है। इन्हें अलग करके रिफाइन किया जाता है और LPG तैयार की जाती है।
2. तेल रिफाइनरियों में
जब कच्चे तेल को गर्म करके पेट्रोल, डीजल और केरोसिन बनाया जाता है, तब कुछ गैसें निकलती हैं। इन्हें इकट्ठा करके LPG बनाई जाती है।
भारत में रिलायंस, IOCL, BPCL और HPCL जैसी कंपनियों की रिफाइनरियों में यह प्रक्रिया होती है।
LPG में गंध क्यों मिलाई जाती है?
प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों में प्राकृतिक रूप से कोई गंध नहीं होती। इसलिए LPG में एथिल मरकैप्टन नाम का केमिकल मिलाया जाता है।
यह केमिकल गैस को तेज गंध देता है ताकि अगर गैस लीक हो तो लोगों को तुरंत पता चल सके और दुर्घटना से बचा जा सके।
ईरान जंग से LPG सप्लाई कैसे प्रभावित हुई?
भारत को खाड़ी देशों जैसे UAE, कतर, सऊदी अरब और कुवैत से बड़ी मात्रा में LPG मिलती है। इन देशों से आने वाले जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरना पड़ता है।
लेकिन अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग पर शिपिंग प्रभावित हो गई है।
पहले इस रास्ते से रोजाना लगभग 153 जहाज गुजरते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर करीब 13 जहाज रह गई है। इसी वजह से वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ा है और भारत में LPG गैस संकट की स्थिति बनने लगी है।
भारत के पास कितने दिन का गैस स्टॉक है?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के पास करीब 10 दिन का LPG बफर स्टॉक मौजूद है।
हालांकि कुछ अनुमान बताते हैं कि अगर समुद्र में आ रहे जहाजों और मौजूदा स्टॉक को जोड़ा जाए तो भारत 40–45 दिन तक जरूरत पूरी कर सकता है।
दूसरे अनुमान के मुताबिक देश करीब 8 सप्ताह तक ऊर्जा जरूरतें पूरी कर सकता है।
अगर जंग लंबी चली तो भारत क्या करेगा?
सरकार वैकल्पिक गैस सप्लायर्स की तलाश कर रही है। संभावित देशों में शामिल हैं:
- अमेरिका
- नॉर्वे
- ऑस्ट्रेलिया
- अल्जीरिया
- नाइजीरिया
- अंगोला
इसके अलावा भारत ने रूस से भी बड़े पैमाने पर कच्चे तेल के ऑर्डर दिए हैं।
सरकार का कहना है कि घरेलू उपयोग के लिए गैस सप्लाई बनाए रखने की पूरी कोशिश की जा रही है ताकि भारत में LPG गैस संकट का असर आम लोगों पर कम पड़े।
गैस की कमी के बीच क्या हैं विकल्प?
अगर गैस की किल्लत बढ़ती है तो लोग कुछ वैकल्पिक उपाय अपना सकते हैं।
इंडक्शन कुकटॉप
बिजली से चलने वाला इंडक्शन LPG का आसान विकल्प है।
सोलर कुकर
धूप से खाना पकाने वाला सोलर कुकर लंबे समय के लिए किफायती विकल्प हो सकता है।
इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर
कम बिजली में दाल, चावल और सब्जी बनाने के लिए उपयोगी।
बायोगैस प्लांट
गोबर और जैविक कचरे से गैस बनाकर घरेलू उपयोग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
✅ निष्कर्ष
अंतरराष्ट्रीय तनाव और सप्लाई चेन में व्यवधान के कारण भारत में LPG गैस संकट की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। हालांकि सरकार वैकल्पिक सप्लाई और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रही है ताकि आम लोगों को ज्यादा परेशानी न हो।
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पेट्रोलियम मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी पेट्रोलियम मंत्रालय (सरकारी जानकारी)

