मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के नए सुप्रीम लीडर का बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ी चर्चा का विषय बन गया है। Mojtaba Khamenei ने पद संभालने के बाद अपने पहले संबोधन में अमेरिका और इजरायल को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान अपने शहीदों, खासकर युद्ध में मारे गए बच्चों का बदला जरूर लेगा और दुश्मनों के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाता रहेगा।
शहीदों के बदले की बात
अपने भाषण में मोजतबा खामेनेई ने कहा कि ईरान उन लोगों की शहादत को कभी नहीं भूलेगा जो हालिया संघर्ष में मारे गए हैं। ईरान के नए सुप्रीम लीडर का बयान साफ संकेत देता है कि देश अपनी सैन्य रणनीति में कोई ढील नहीं देने वाला है।
उन्होंने कहा कि ईरान की कार्रवाई केवल उन ठिकानों तक सीमित होगी जिन्हें वह अपने दुश्मनों के सैन्य अड्डे मानता है। उनका कहना है कि आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाना ईरान की नीति नहीं है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर सख्त रुख
Strait of Hormuz को लेकर भी नए सुप्रीम लीडर का बयान काफी सख्त माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बंद रहेगा और ईरान किसी भी दबाव में इसे खोलने के लिए तैयार नहीं है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
पड़ोसी देशों के लिए संदेश
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ दोस्ती और सहयोग बनाए रखना चाहता है। हालांकि Mojtaba Khamenei का बयान यह भी साफ करता है कि देश अपने दुश्मनों के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगा।
मिडिल ईस्ट में बढ़ सकता है तनाव
Middle East में पहले से ही कई संघर्ष चल रहे हैं। ऐसे में नए सुप्रीम लीडर का बयान क्षेत्र की स्थिति को और ज्यादा संवेदनशील बना सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर टकराव बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर भी देखने को मिल सकता है।
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मिडिल ईस्ट की ताजा स्थिति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया के बारे में अधिक जानकारी BBC News और Reuters जैसी अंतरराष्ट्रीय न्यूज वेबसाइट्स पर पढ़ी जा सकती है।
