पहलगाम आतंकी हमला 2025: “मेरे बेटे ने सिर्फ इंसान देखा” — आदिल के पिता का भावुक बयान
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पहलगाम आतंकी हमला 2025: “उन्होंने धर्म देखकर मारा, मेरे बेटे ने नहीं” — आदिल को घर मिलने पर भावुक हुए पिता

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पहलगाम आतंकी हमला 2025 – एक दर्दनाक याद

पहलगाम आतंकी हमला 2025 को आज एक साल पूरा हो चुका है, लेकिन इस घटना की दर्दनाक यादें आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ यह हमला कई परिवारों के लिए कभी न भूलने वाली त्रासदी बन गया।

एक साल बाद भी नहीं भरा जख्म

इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई, जिनमें आदिल हुसैन शाह भी शामिल थे। पहलगाम आतंकी हमला के बाद से उनका परिवार आज तक इस सदमे से बाहर नहीं आ पाया है। उनके पिता सैयद हैदर शाह अपने बेटे को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं।

कौन थे आदिल हुसैन शाह?

आदिल हुसैन शाह एक साधारण पोनीवाला थे, जो पर्यटकों को घुड़सवारी कराकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। पहलगाम आतंकी हमला ने उनके परिवार से उनका सबसे बड़ा सहारा छीन लिया।

हमले के दिन क्या हुआ था?

पहलगाम आतंकी हमले के दिन अचानक गोलियां चलने लगीं और हर तरफ अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे, लेकिन आदिल ने अलग रास्ता चुना।

पर्यटकों को बचाने में दी अपनी जान

जब हर कोई खुद को बचाने में लगा था, तब आदिल ने अपनी जान की परवाह किए बिना पर्यटकों को बचाने की कोशिश की। पहलगाम आतंकी हमला 2025 के दौरान उन्होंने एक आतंकी की राइफल पकड़ने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान वे गोली का शिकार हो गए।

सरकार और नेताओं का मिला सहयोग

पहलगाम आतंकी हमला 2025 के बाद आदिल के परिवार को सरकार और कई नेताओं से मदद मिली। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आर्थिक सहायता के साथ घर बनवाने का वादा भी पूरा किया।

परिवार को मिली सरकारी सहायता

पहलगाम आतंकी हमला 2025 के बाद:

  • पत्नी को सरकारी नौकरी
  • 5–7 लाख रुपये की आर्थिक सहायता
  • छोटे भाई को वक्फ बोर्ड में नौकरी

मिली, जिससे परिवार को कुछ सहारा मिला।


इंसानियत की मिसाल

आदिल ने पहलगाम आतंकी हमला 2025 के दौरान यह नहीं देखा कि कौन किस धर्म का है। उन्होंने सिर्फ इंसानियत को प्राथमिकता दी और दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान दे दी।


दर्द और गर्व दोनों साथ

पहलगाम आतंकी हमला 2025 के बाद आदिल का परिवार आज भी दो भावनाओं के साथ जी रहा है—दर्द और गर्व। एक तरफ बेटे को खोने का गम है, तो दूसरी तरफ उसकी बहादुरी पर गर्व।


निष्कर्ष

पहलगाम आतंकी हमला 2025 सिर्फ एक आतंकी घटना नहीं, बल्कि इंसानियत और साहस की मिसाल भी है। आदिल हुसैन शाह की कहानी हमें सिखाती है कि असली हीरो वही होता है, जो दूसरों के लिए अपनी जान की बाजी लगा दे।

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