सहजन (मोरिंगा) के फायदे: 300 रोगों में उपयोगी आयुर्वेदिक सुपरफूड

सहजन (मोरिंगा) के फायदे: जड़ से फल तक सेहत का प्राकृतिक खजाना

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सहजन (मोरिंगा) के फायदे सदियों से आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में बताए जाते रहे हैं। वैज्ञानिक नाम Moringa oleifera वाला यह पौधा पोषक तत्वों का भंडार माना जाता है। भारत में इसे सहजन, मोरिंगा, मुनगा या सुजना के नाम से जाना जाता है। इसकी खास बात यह है कि जड़, पत्ते, फूल, फल, बीज और छाल—हर भाग किसी न किसी रूप में उपयोगी होता है।

आज के समय में जब लोग प्राकृतिक और पौष्टिक विकल्पों की तलाश में हैं, सहजन एक सुपरफूड के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। आइए जानते हैं, आखिर क्यों सहजन को सेहत का खजाना कहा जाता है।


सहजन का पोषण प्रोफाइल – क्यों है यह खास?

सहजन पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें पाए जाने वाले प्रमुख तत्व हैं:

  • प्रोटीन
  • कैल्शियम (गैर-डेयरी स्रोत)
  • आयरन
  • पोटैशियम
  • मैग्नीशियम
  • जिंक
  • विटामिन A, C और B कॉम्प्लेक्स
  • ओमेगा-3 फैटी एसिड
  • 40 से अधिक एंटीऑक्सीडेंट

सहजन में एंटीफंगल, एंटीवायरल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण भी पाए जाते हैं, जो शरीर को कई प्रकार की बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं।


सहजन (मोरिंगा) के फायदे विस्तार से

1. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है

सहजन में मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की इम्यूनिटी मजबूत करते हैं। नियमित सेवन से संक्रमण का खतरा कम हो सकता है।

2. ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में सहायक

सहजन की पत्तियों में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो इंसुलिन के स्तर को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं। डायबिटीज के मरीज डॉक्टर की सलाह से इसका सेवन कर सकते हैं।

3. हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी

ओमेगा-3 फैटी एसिड और पोटैशियम खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में सहायक हो सकते हैं।

4. पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है

सहजन के फूल और पत्तियों में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं में राहत दिला सकती है।

5. हड्डियों को मजबूती

कैल्शियम और मैग्नीशियम की मौजूदगी हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करती है, खासकर उन लोगों के लिए जो दूध का सेवन नहीं करते।

6. आंखों की रोशनी के लिए फायदेमंद

विटामिन A से भरपूर सहजन आंखों की सेहत के लिए लाभकारी माना जाता है।

7. वजन घटाने में सहायक

सहजन में क्लोरोजेनिक एसिड जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

8. लीवर और मस्तिष्क के लिए लाभकारी

कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि सहजन की पत्तियों का अर्क लीवर एंजाइम्स के कार्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। वहीं ओमेगा-3 फैटी एसिड दिमागी कार्यक्षमता और याददाश्त के लिए उपयोगी माने जाते हैं।


महिलाओं के लिए सहजन के फायदे

  • यूरिन इन्फेक्शन में फूलों की चाय लाभकारी हो सकती है।
  • स्तनपान कराने वाली महिलाएं (डॉक्टर की सलाह से) सहजन का सेवन कर सकती हैं।
  • आयरन की अधिक मात्रा एनीमिया की समस्या में मददगार हो सकती है।
  • बालों के झड़ने और त्वचा की समस्याओं में भी सहजन उपयोगी माना जाता है।

सहजन को डाइट में कैसे शामिल करें?

सहजन को कई तरीकों से अपने भोजन में शामिल किया जा सकता है:

  • पत्तियों का जूस
  • पाउडर (लगभग 2 ग्राम, डॉक्टर की सलाह से)
  • सूप और सब्जी
  • दाल में मिलाकर
  • फूलों की चाय
  • कच्ची पत्तियों का सीमित सेवन

दक्षिण भारत में सहजन की फली का उपयोग सांभर और सब्जियों में खूब किया जाता है।


क्या सच में 300 बीमारियों की दवा?

आयुर्वेद में सहजन को अनेक रोगों में उपयोगी बताया गया है। हालांकि “300 बीमारियों की दवा” जैसी बातें पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। आधुनिक विज्ञान अभी भी इसके कई गुणों पर शोध कर रहा है। इसलिए इसे चमत्कारी इलाज की तरह नहीं, बल्कि एक पौष्टिक और सहायक आहार के रूप में देखना बेहतर है।


सहजन के संभावित नुकसान

जहां फायदे हैं, वहीं कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं:

  • लो ब्लड प्रेशर वाले लोग सावधानी बरतें।
  • गर्भावस्था में बिना डॉक्टर की सलाह सेवन न करें।
  • अधिक मात्रा में सेवन से पित्त संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
  • ब्लीडिंग डिसऑर्डर वाले लोग डॉक्टर से सलाह लें।
  • डिलीवरी के तुरंत बाद इसके बीज या छाल का सेवन न करें।

किसी भी हर्बल चीज की तरह, सहजन का अत्यधिक सेवन नुकसानदेह हो सकता है।


निष्कर्ष

सहजन (मोरिंगा) के फायदे इसे एक शक्तिशाली प्राकृतिक सुपरफूड बनाते हैं। यह इम्यूनिटी बढ़ाने, पाचन सुधारने, हृदय स्वास्थ्य बनाए रखने और शरीर को पोषण देने में सहायक हो सकता है। हालांकि इसे चमत्कारी इलाज मानने के बजाय संतुलित आहार का हिस्सा बनाना अधिक उचित है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में उपयोग से पहले डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

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