डोनाडोनाल्ड ट्रम्प वेनेजुएला विवाद: खुद को अंतरिम राष्ट्रपति बतायाल्ड ट्रम्प वेनेजुएला विवाद: खुद को अंतरिम राष्ट्रपति बताया

डोनाल्ड ट्रम्प वेनेजुएला विवाद: खुद को अंतरिम राष्ट्रपति बताने से वैश्विक राजनीति में हलचल

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डोनाल्ड ट्रम्प वेनेजुएला को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक ऐसा पोस्ट साझा किया, जिसने दुनिया भर में चर्चा छेड़ दी है। इस पोस्ट में ट्रम्प ने खुद को वेनेजुएला का एक्टिंग प्रेसिडेंट यानी अंतरिम राष्ट्रपति बताया और दावा किया कि वे जनवरी 2026 से यह जिम्मेदारी संभालेंगे।

इस दावे ने न केवल अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्तों को सुर्खियों में ला दिया है, बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका में राजनीतिक अस्थिरता की आशंका भी बढ़ा दी है।


डोनाल्ड ट्रम्प वेनेजुएला को लेकर क्यों चर्चा में हैं?

डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी पोस्ट में खुद को अमेरिका का 45वां और 47वां राष्ट्रपति बताते हुए वेनेजुएला के अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में पेश किया। हालांकि इस पोस्ट को लेकर अभी तक व्हाइट हाउस या अमेरिकी प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रम्प वेनेजुएला मुद्दे को केवल एक सोशल मीडिया स्टंट मानना गलत होगा, क्योंकि ट्रम्प पहले भी अपने बयानों के जरिए भविष्य की रणनीतियों का संकेत देते रहे हैं।


अमेरिका की कार्रवाई और वेनेजुएला की सत्ता में बदलाव

3 जनवरी को अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई के दौरान वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में लेकर न्यूयॉर्क लाया गया।

मादुरो के सत्ता से हटने के बाद, वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को देश की अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई गई। हालांकि डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि यह व्यवस्था अस्थायी है और वेनेजुएला का प्रशासन अमेरिका की निगरानी में चलेगा।


“वेनेजुएला का प्रशासन अमेरिका चलाएगा” – ट्रम्प का बयान

डोनाल्ड ट्रम्प वेनेजुएला के भविष्य को लेकर काफी आक्रामक रुख अपनाते नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि अमेरिका तब तक वेनेजुएला के प्रशासन में हस्तक्षेप करेगा, जब तक वहां सुरक्षित और स्थायी सत्ता परिवर्तन नहीं हो जाता।

ट्रम्प के अनुसार, अमेरिका यह जोखिम नहीं लेना चाहता कि वेनेजुएला में दोबारा कोई ऐसा नेतृत्व आए जो जनता के हितों की अनदेखी करे और देश को आर्थिक संकट में धकेल दे।


वेनेजुएला तेल समझौता और अमेरिका की रणनीति

डोनाल्ड ट्रम्प वेनेजुएला संकट को केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक नजरिए से भी देख रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि अंतरिम सरकार अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल हाई क्वालिटी प्रतिबंधित तेल सौंपेगी।

यह तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में मौजूदा कीमतों पर बेचा जाएगा और इससे मिलने वाली राशि अमेरिकी राष्ट्रपति के नियंत्रण में रहेगी। ट्रम्प के मुताबिक, इस फंड का इस्तेमाल अमेरिका और वेनेजुएला – दोनों देशों के नागरिकों के हित में किया जाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस राइट को इस योजना को तुरंत लागू करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।


अमेरिकी कंपनियों की वेनेजुएला में एंट्री

डोनाल्ड ट्रम्प वेनेजुएला में अमेरिकी निवेश को बढ़ावा देने के पक्ष में हैं। इसी कड़ी में उन्होंने एक्सॉन मोबिल, शेवरॉन और कोनोकोफिलिप्स जैसी बड़ी अमेरिकी तेल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की।

ट्रम्प ने साफ किया कि अब अमेरिका तय करेगा कि कौन-सी कंपनियां वेनेजुएला में निवेश करेंगी और किसे अनुमति दी जाएगी।

शेवरॉन का रुख

शेवरॉन के वाइस चेयरमैन मार्क नेल्सन ने कहा कि उनकी कंपनी पहले से ही वेनेजुएला में काम कर रही है और आगे भी निवेश के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक में शामिल अन्य निवेशकों ने भी ट्रम्प की नीति की सराहना की।


सैन्य कार्रवाई में 100 सैनिकों की मौत का दावा

वेनेजुएला के गृह मंत्रालय के अनुसार, 3 जनवरी की अमेरिकी कार्रवाई में करीब 100 सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ये मौतें किस तरह के हथियारों से हुईं।

डायरेक्टेड एनर्जी हथियारों पर शक

अमेरिका के एक पूर्व खुफिया अधिकारी ने दावा किया कि इस ऑपरेशन में डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स का इस्तेमाल हो सकता है। ऐसे हथियार माइक्रोवेव या लेजर तकनीक पर आधारित होते हैं और इससे गंभीर शारीरिक प्रभाव पड़ सकते हैं।

हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।


लैटिन अमेरिका में बढ़ता डर

डोनाल्ड ट्रम्प वेनेजुएला को लेकर जिस तरह का रुख अपना रहे हैं, उससे पूरे लैटिन अमेरिका में चिंता का माहौल है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस कार्रवाई का असर केवल वेनेजुएला तक सीमित नहीं रहेगा।

एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, ट्रम्प पहले ही संकेत दे चुके हैं कि मेक्सिको भी अब अमेरिकी रणनीतिक सूची में शामिल है। इसे अमेरिका से टकराव की सोच रखने वाले देशों के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।


अंतरराष्ट्रीय कानून पर उठते सवाल

कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने सवाल उठाया है कि किसी संप्रभु देश के प्रशासन को दूसरे देश द्वारा नियंत्रित करना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डोनाल्ड ट्रम्प वेनेजुएला को लेकर अपने दावों को आधिकारिक नीति में बदलते हैं, तो यह संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक कूटनीति के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।


निष्कर्ष: आगे क्या?

कुल मिलाकर, डोनाल्ड ट्रम्प वेनेजुएला विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं है। यह वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करने वाला मुद्दा बन चुका है।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या ट्रम्प का यह दावा केवल राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है या फिर आने वाले समय में दुनिया एक नए भू-राजनीतिक संघर्ष की ओर बढ़ने वाली है।

इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक अमेरिकी प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिसकी जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय (White House) की वेबसाइट पर देखी जा सकती है।

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