कोटद्वार दीपक विवाद इन दिनों उत्तराखंड में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। दरअसल, 26 जनवरी को कोटद्वार में एक बुज़ुर्ग दुकानदार के समर्थन में खड़े हुए जिम ट्रेनर दीपक कुमार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसके बाद मामला तेजी से बढ़ा। विरोध प्रदर्शन हुए और धमकी के आरोप भी लगे। साथ ही, पुलिस में तीन FIR दर्ज की गईं।
प्रशासन का कहना है कि हालात नियंत्रण में हैं। हालांकि, दीपक और उनके समर्थक सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि घटना के बाद परिवार डरा हुआ है। इस वजह से, उनका काम भी प्रभावित हुआ है।
कोटद्वार दीपक विवाद पूरा मामला क्या है?
कोटद्वार के पटेल मार्ग स्थित मार्केट में “बाबा स्कूल ड्रेस” नाम की एक दुकान है, जिसे 70 वर्षीय वकील अहमद चलाते हैं। 26 जनवरी को कुछ लोग, जो खुद को बजरंग दल से जुड़ा बता रहे थे, दुकान पर पहुंचे और दुकान के नाम से “बाबा” शब्द हटाने की बात कही। उनका तर्क था कि इससे सिद्धबली बाबा मंदिर के नाम को लेकर भ्रम फैलता है।
इसी दौरान, भीड़ ने उनका नाम पूछा। दीपक ने “मोहम्मद दीपक” नाम बताया। उनके अनुसार, यह उन्होंने एकजुटता दिखाने के लिए कहा। लेकिन, यही वीडियो बाद में वायरल हो गया और विवाद बढ़ गया।
कोटद्वार दीपक विवाद विरोध और धमकी के आरोप
वीडियो वायरल होने के बाद 31 जनवरी को दीपक के जिम के बाहर विरोध प्रदर्शन हुआ। आरोप है कि कुछ लोगों ने वहां नारेबाज़ी की और धमकी भरे वीडियो भी सामने आए, जिनमें दीपक को “टारगेट पर” बताया गया। दीपक का कहना है कि इस घटना के बाद उनका परिवार डरा हुआ है, उनकी बेटी स्कूल नहीं जा पा रही और वे खुद भी असहज महसूस कर रहे हैं।
हालांकि वे यह भी कहते हैं कि उन्हें स्थानीय लोगों और जिम से जुड़े कई लोगों का समर्थन मिल रहा है।
कोटद्वार दीपक विवाद में बजरंग दल का पक्ष
बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे “जिसका काम, उसी का नाम” अभियान चला रहे हैं। इस अभियान के तहत वे व्यापारिक प्रतिष्ठानों में वास्तविक पहचान से नाम रखने की बात कर रहे हैं। संगठन का आरोप है कि दीपक ने उनके एक बुज़ुर्ग कार्यकर्ता के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की। उनका कहना है कि उन्होंने पहले पुलिस में शिकायत दी थी, कार्रवाई न होने पर विरोध प्रदर्शन किया गया।
पुलिस की कार्रवाई: तीन FIR दर्ज
कोटद्वार दीपक विवाद इस पूरे मामले में पुलिस ने तीन अलग-अलग FIR दर्ज की हैं:
- पहली FIR दुकानदार वकील अहमद की शिकायत पर, जिसमें कुछ कार्यकर्ताओं पर दुकान में घुसकर धमकी और गाली-गलौज के आरोप हैं।
- दूसरी FIR दीपक कुमार और उनके एक साथी के खिलाफ, जिसमें मारपीट, लूट और अभद्र भाषा के आरोप लगाए गए हैं।
- तीसरी FIR पुलिस द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर 30–40 अज्ञात लोगों के खिलाफ, जिन पर चक्का जाम, उपद्रव और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस का कहना है कि FIR दर्ज होना अंतिम दोष सिद्ध होना नहीं है, जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
सुरक्षा को लेकर चिंता
दीपक ने एक वीडियो जारी कर अपनी जान को खतरा बताया था। जमीअत उलेमा-ए-हिंद (उत्तराखंड) ने भी DGP को पत्र लिखकर उन्हें सुरक्षा देने की मांग की है। पुलिस का कहना है कि उन्हें किसी बड़े खतरे की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एहतियात के तौर पर गश्त बढ़ाई गई है और इलाके में शांति बैठक भी कराई गई है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी
इस मामले ने राजनीतिक रंग भी लिया है। कुछ राष्ट्रीय नेताओं ने सोशल मीडिया पर दीपक के समर्थन में पोस्ट किए हैं, जिससे मामला और चर्चा में आ गया है।
वर्तमान स्थिति
पुलिस के अनुसार फिलहाल कोटद्वार में स्थिति सामान्य है, लेकिन संवेदनशीलता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है। प्रशासन का कहना है कि सोशल मीडिया पर कई बातें बढ़ा-चढ़ाकर फैलाई जा रही हैं, जबकि जांच जारी है।
निष्कर्ष:
यह मामला सिर्फ एक दुकान के नाम या एक वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पहचान, धार्मिक संवेदनशीलता, कानून व्यवस्था और सोशल मीडिया की भूमिका जैसे कई पहलुओं से जुड़ गया है। फिलहाल सबकी नजर पुलिस जांच पर है, जो तय करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।

