अनिल शर्मा सफलता की कहानी हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है जो सपनों को सच करना चाहता है। मां के गहने गिरवी रखकर पहली फिल्म बनाने से लेकर 800 करोड़ की ब्लॉकबस्टर ‘गदर-2’ तक का उनका सफर संघर्ष, मेहनत और जुनून की मिसाल है।
आज उनकी पहचान ‘गदर’ और ‘गदर-2’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों से है, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने कितनी चुनौतियों का सामना किया – यह कहानी जानना बेहद प्रेरणादायक है।
बचपन में ही तय कर लिया सपना
मथुरा की होली वाली गलियों में पले-बढ़े अनिल शर्मा बचपन से ही फिल्मी सितारों को देखकर आकर्षित हुए। उनके घर पर मशहूर सिंगर गीता दत्त भी आईं और वहीं से फिल्मों के प्रति उनके मन में जिज्ञासा और लगाव बढ़ा। कृष्णलीला और नाटकों में हिस्सा लेते-लेते उन्हें एहसास हुआ कि उनका असली जुनून एक्टिंग में नहीं, बल्कि डायरेक्शन में है।
17 साल की उम्र में बीआर चोपड़ा के असिस्टेंट बने
महज 17 साल की उम्र में अनिल शर्मा ने बॉलीवुड के मशहूर फिल्मकार बी.आर. चोपड़ा के यहां असिस्टेंट के तौर पर काम करना शुरू कर दिया। शुरूआती दिनों में उन्हें सेट पर कई मुश्किलें झेलनी पड़ीं – किसी ने सीधे मुंह बात नहीं की, काम करने नहीं दिया, लेकिन धीरे-धीरे उनकी मेहनत और लगन ने सबका दिल जीत लिया।
‘द बर्निंग ट्रेन’ जैसी फिल्मों में उन्होंने असिस्टेंट के तौर पर काम किया और हिंदी की अच्छी पकड़ के कारण जल्दी ही टीम का जरूरी हिस्सा बन गए।
मां के गहनों से बनी पहली फिल्म ‘श्रद्धांजलि’
सिर्फ 21 साल की उम्र में उन्होंने अपनी पहली फिल्म ‘श्रद्धांजलि’ बनाई। फिल्म की हीरोइन सुपरस्टार राखी थीं। लेकिन उस समय फिल्म बनाने के लिए पैसे जुटाना सबसे बड़ी चुनौती थी। जब पैसों की कमी पड़ी, तो उनकी मां ने अपने शादी के गहने गिरवी रख दिए। उन्हीं पैसों से फिल्म की शूटिंग शुरू हुई और फिल्म रिलीज के बाद सुपरहिट साबित हुई।
यहां से अनिल शर्मा के करियर की गाड़ी चल पड़ी और उन्होंने लगातार हिट फिल्मों की झड़ी लगा दी।
‘गदर’ बनाने पर कहा गया ‘गटर’
साल 2001 में अनिल शर्मा ने सनी देओल और अमीषा पटेल को लेकर ‘गदर: एक प्रेम कथा’ बनाई। रिलीज से पहले इंडस्ट्री के कई लोग इस फिल्म को रिजेक्ट कर चुके थे। डिस्ट्रीब्यूटर्स ने तक कहा था कि ये फिल्म नहीं चलेगी, यहां तक कि किसी ने इसे “गटर एक प्रेम कथा” कहकर मजाक उड़ाया।
लेकिन किस्मत और मेहनत का खेल देखिए – फिल्म रिलीज हुई और इतिहास रच दिया। ‘गदर’ उस दौर की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म बनी, जिसका फुटफॉल 10 करोड़ तक पहुंच गया। लोग ट्रैक्टरों पर बैठकर फिल्म देखने आते थे और थिएटर्स में 24 घंटे शो चलते थे।
‘गदर-2’ पर भी उठे सवाल, लेकिन हुआ 800 करोड़ का धमाका
इंडस्ट्री में जब उन्होंने ‘गदर-2’ बनाने का फैसला लिया तो फिर से लोग शक करने लगे। फिल्म को सिर्फ 60 करोड़ के बजट में बनाया गया, लेकिन रिलीज के बाद दर्शकों ने इसे हाथोंहाथ लिया।
‘गदर-2’ ने 800 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस किया। अगर टिकट की कीमतें ज्यादा रखी जातीं तो फिल्म का कलेक्शन 1500 करोड़ तक पहुंच सकता था।
अनिल शर्मा की कहानी क्यों है खास?
अनिल शर्मा की कहानी हमें यह सिखाती है कि –
- सपनों के लिए जुनून और मेहनत जरूरी है।
- हालात चाहे जैसे हों, अगर परिवार का साथ हो तो मुश्किलें आसान हो जाती हैं।
- जब लोग आपके काम पर शक करें, तो वही वक्त सबसे बड़ा मोटिवेशन बन जाता है।
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निष्कर्ष
अनिल शर्मा की जर्नी एक असली सफलता की कहानी है। मां के गहनों से बनी पहली फिल्म से लेकर 800 करोड़ कमाने वाली ‘गदर-2’ तक का सफर यह बताता है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी सपना नामुमकिन नहीं है।