भारत में उच्च शिक्षा की प्रणाली में जातिगत भेदभाव को नियंत्रित करने के लिए UGC (University Grants Commission) द्वारा लागू किए गए “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” ने बड़े पैमाने पर सामाजिक व कानूनी संघर्ष खड़े कर दिए हैं। यह नियम 15 जनवरी 2026 से पूरे देश के कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में लागू हो गए हैं।
लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट में इस नियम के खिलाफ याचिका दायर की गई है, जिसने विवाद को और बढ़ा दिया है।
📌 UGC Regulations 2026 क्या हैं?
नए नियमों का मूल उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकना है।
नियम के तहत:
- सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में इक्विटी कमेटी बनाना अनिवार्य है।
- इसमें SC/ST/OBC/PwD और महिलाओं के सदस्य शामिल होंगे।
- 24×7 हेल्पलाइन उपलब्ध करानी होगी।
- भेदभाव की शिकायत मिलने पर 24 घंटे में कार्रवाई शुरू करनी होगी।
- जांच 60 दिनों के अंदर पूरी की जानी चाहिए।
- नियमों के उल्लंघन पर मान्यता रद्द या UGC फंडिंग रोकी जा सकती है।
ये नियम 2012 की पुरानी नियमावली का अपडेट हैं, जिन्हें संसदीय समिति की सिफारिश पर संशोधित कर लागू किया गया।
⚠️ नए नियमों पर विवाद क्यों?
नियमावली 2026 के अंतर्गत Regulation 3(c) को लेकर एक बड़ा आरोप उठाया गया है।
याचिकाकर्ता मृत्युंजय तिवारी की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि:
- नियम केवल SC, ST और OBC के खिलाफ जातिगत भेदभाव की शिकायतों को ही मान्यता देता है।
- सामान्य वर्ग के लोगों को शिकायत दर्ज कराने का अधिकार नहीं मिलता।
- यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
- अतः इसे असंवैधानिक घोषित किया जाए।
- साथ ही 2026 नियम के तहत बने सभी शिकायत निवारण तंत्र को जाति-निरपेक्ष रूप से सभी के लिए लागू करने का निर्देश दिया जाए।
📅 नए नियम कब लागू हुए?
ये नियम 15 जनवरी 2026 से लागू हैं।
इन्हें लागू करते ही सोशल मीडिया पर और सड़कों पर भारी प्रतिक्रिया देखने को मिली। बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षित युवा और शिक्षक वर्ग इसे दुरुपयोग का साधन मान रहे हैं।
कई लोगों का दावा है कि नियम वास्तविक भेदभाव रोकने के बजाय बदले की भावना के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
🧾 UGC नियमों के बनने की प्रक्रिया
- संसद की शिक्षा, महिला, बाल और युवा मामलों की संसदीय समिति ने UGC ड्राफ्ट की समीक्षा की।
- 8 दिसंबर 2025 को सिफारिशें सरकार को दी गईं।
- समिति ने OBC को जातिगत भेदभाव में शामिल करने की सलाह दी।
- साथ ही समिति ने डिसेबिलिटी (अक्षम्यता) को भी भेदभाव की श्रेणी में लाने का सुझाव दिया।
- कुछ रिपोर्टों में समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह की भूमिका को लेकर आलोचनाएं भी सामने आईं, क्योंकि कहा गया कि उनकी अगुवाई में OBC को शामिल करने की सिफारिश ने अंतिम नियमों को प्रभावित किया।
इन सिफारिशों के आधार पर UGC ने नियमावली में बदलाव कर जनवरी 2026 में इसे लागू कर दिया।
🙋♂️ क्या बदलाव किए गए हैं?
नए नियमों के तहत:
✔️ इक्विटी कमेटी का गठन अनिवार्य
✔️ SC/ST/OBC, PwD और महिला प्रतिनिधि शामिल
✔️ 24×7 शिकायत हेल्पलाइन
✔️ 24 घंटे में प्रारंभिक कार्रवाई
✔️ 60 दिन में जांच पूरी
✔️ उल्लंघन पर कड़ी सजा
लेकिन नियम में ऐसी धाराएँ भी हैं:
❌ False Complaint पर जुर्माने का प्रावधान हटाया गया
जिससे आलोचना और तेज हो गई है।
📍 सुप्रीम कोर्ट में याचिका: मुख्य माँगें
याचिका में मुख्य मांगें हैं:
✔️ Regulation 3(c) को असंवैधानिक घोषित करना
✔️ लागू करने पर रोक लगाना
✔️ शिकायत निवारण तंत्र को जाति-निरपेक्ष बनाना
अब मामला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए विचाराधीन है, और इस पर जल्द ही बड़ा फैसला आने की उम्मीद है।
🧠 निष्कर्ष
UGC Regulations 2026 का उद्देश्य भेदभाव को रोकना भले हो, लेकिन नियमावली में जो पक्षपात प्रतीत होता है, उसने व्यापक विवाद उत्पन्न कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के परिणाम से उच्च शिक्षा के भविष्य पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।
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