RSS प्रमुख मोहन भागवत का बयान इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। लखनऊ में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक के दौरान उन्होंने जनसंख्या संतुलन, सामाजिक एकता, घुसपैठ, जाति व्यवस्था और महिलाओं की भूमिका जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से अपने विचार रखे। उनका संदेश स्पष्ट था—समाज की मजबूती आपसी विश्वास और सांस्कृतिक एकता से ही संभव है।
सामाजिक एकता पर जोर
बैठक में उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोग एक ही सांस्कृतिक विरासत से जुड़े हैं। धार्मिक या जातिगत आधार पर विभाजन समाज को कमजोर करता है। उनका मानना है कि संवाद और सद्भाव के माध्यम से ही अविश्वास को खत्म किया जा सकता है।
जनसंख्या संतुलन और परिवार व्यवस्था
RSS प्रमुख मोहन भागवत का बयान जनसंख्या दर को लेकर भी चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज के स्थायित्व के लिए संतुलित जनसंख्या आवश्यक है। विवाह को केवल व्यक्तिगत सुख तक सीमित न रखकर सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में भी देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, यदि समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होंगे तो भविष्य में संतुलन प्रभावित हो सकता है।
घुसपैठ और राष्ट्रीय सुरक्षा
उन्होंने बढ़ती घुसपैठ पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है। अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान और उचित कार्रवाई आवश्यक है। राष्ट्र के संसाधन और रोजगार के अवसर वैध नागरिकों को ही मिलने चाहिए।
जाति व्यवस्था और सामाजिक विषमता
Rashtriya Swayamsevak Sangh के प्रमुख ने समाज में जातिगत भेदभाव को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सदियों के विदेशी शासन के बावजूद भारतीय संस्कृति मजबूत रही है, लेकिन आंतरिक विभाजन समाज को कमजोर करता है। समाज के प्रत्येक वर्ग को मिलकर शिक्षा, उन्नति और आपसी सहयोग की दिशा में काम करना चाहिए।
कानून और UGC गाइडलाइंस पर विचार
UGC से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने कहा कि कानून का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। यदि किसी कानून से असहमति हो तो संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखी जानी चाहिए। संघर्ष नहीं, बल्कि समन्वय और संवाद से समाधान संभव है।
महिलाओं की भूमिका
RSS प्रमुख मोहन भागवत का बयान महिलाओं की भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में स्त्री को शक्ति का स्वरूप माना गया है। महिलाओं को आत्मरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए प्रशिक्षित होना चाहिए। परिवार और समाज की आधारशिला मातृशक्ति ही है।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत
उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को सजग और एकजुट रहना होगा। उनका विश्वास है कि भारत भविष्य में विश्व को दिशा देने की क्षमता रखता है, क्योंकि यहां की संस्कृति समन्वय और सहअस्तित्व पर आधारित है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, RSS प्रमुख मोहन भागवत का बयान सामाजिक समरसता, जनसंख्या संतुलन और राष्ट्रीय एकता पर केंद्रित रहा। उनका संदेश था कि समाज को जाति और मतभेदों से ऊपर उठकर सहयोग, संवाद और सद्भाव की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
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