पान सिंह तोमर डकैत नहीं राष्ट्रीय हीरो हैं—यह कहना है उनकी पोती सपना तोमर का, जिन्होंने अपने दादा की छवि को लेकर फैल रही गलत धारणाओं पर खुलकर विरोध दर्ज कराया है। सपना का कहना है कि देश के लिए मेडल जीतने वाले एथलीट को सिर्फ एक विवादित शब्द में समेट देना इतिहास और सच्चाई दोनों के साथ अन्याय है।
नेशनल एथलीट की विरासत को बदनाम करने का आरोप
सपना तोमर ने कहा कि पान सिंह तोमर डकैत नहीं रास्ट्रीय थे वे भारतीय सेना के जवान थे और सात बार राष्ट्रीय चैंपियन रह चुके थे।
उन्होंने एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश का नाम रोशन किया।
ऐसे में उन्हें केवल “डकैत” कहकर पुकारना उनकी खेल उपलब्धियों और बलिदान को नकारने जैसा है।
उनका साफ कहना है—
“पान सिंह तोमर डकैत नहीं राष्ट्रीय हीरो थे, यह सच्चाई हर पीढ़ी को जाननी चाहिए।”
वायरल वीडियो पर दी सफाई
हाल ही में सामने आए एक वायरल वीडियो को लेकर सपना तोमर ने कहा कि वीडियो को अधूरा और भ्रामक रूप में पेश किया गया।
उन्होंने बताया कि बिजली विभाग के एक कर्मचारी से विवाद के दौरान उन्होंने आत्मरक्षा में प्रतिक्रिया दी थी।
सपना ने कहा,
“जब एक महिला के साथ दुर्व्यवहार होता है, तो उसका विरोध करना अपराध नहीं हो सकता।”
प्रशासन और पुलिस पर सवाल
सपना तोमर ने आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने उनकी बात गंभीरता से नहीं ली।
बिल जमा होने के बावजूद बिजली कनेक्शन काट दिया गया, जिससे परिवार को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने भावुक होकर कहा,
“मेरी 95 साल की दादी हैं, बहन बीमार है। पूरे परिवार को अंधेरे में रखना क्या इंसाफ है?”
निष्पक्ष जांच की मांग
सपना ने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि पान सिंह तोमर डकैत नहीं राष्ट्रीय हीरो थे, जिन्हें परिस्थितियों ने एक अलग राह पर धकेल दिया।
कौन थे पान सिंह तोमर
पान सिंह तोमर मध्यप्रदेश के मुरैना जिले से ताल्लुक रखते थे।
वे भारतीय सेना में सेवाएं देने के साथ-साथ देश के सबसे सफल स्टीपलचेज धावकों में शामिल रहे।
सेवानिवृत्ति के बाद भूमि विवाद में फंसने के कारण उनका जीवन विवादों से घिर गया, लेकिन उनकी खेल विरासत आज भी गर्व का विषय है।

