अमेरिका वीजा नियम 2025 के तहत क्या बदला है?
अमेरिका वीजा नियम 2025 के तहत अब डायबिटीज, मोटापा और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए अमेरिका में प्रवेश पाना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने दुनियाभर के दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को नया निर्देश जारी किया है कि वे ऐसे आवेदकों को वीजा देने में सख्ती बरतें जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रसित हैं।
यह बदलाव “पब्लिक चार्ज पॉलिसी” के तहत किया गया है, जिसका उद्देश्य उन अप्रवासियों को रोकना है जो भविष्य में अमेरिकी सरकारी संसाधनों पर निर्भर हो सकते हैं।
🔹 क्यों बदले गए अमेरिका वीजा नियम 2025
अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि जिन व्यक्तियों को लंबे समय तक महंगी चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है, वे अमेरिकी टैक्सदाताओं पर बोझ बन सकते हैं।
इसलिए अमेरिका वीजा नियम 2025 के अनुसार वीजा अधिकारी अब प्रत्येक आवेदक की हेल्थ रिपोर्ट, उम्र और वित्तीय स्थिति का गहराई से मूल्यांकन करेंगे।
अगर किसी व्यक्ति के इलाज का खर्च बहुत अधिक है या वह भविष्य में सरकारी सहायता पर निर्भर हो सकता है, तो उसका वीजा या ग्रीन कार्ड रिजेक्ट कर दिया जाएगा।
🔹 किन बीमारियों पर सख्ती बढ़ी है
नए अमेरिका वीजा नियम 2025 में जिन बीमारियों को “उच्च जोखिम” माना गया है, उनमें शामिल हैं:
- डायबिटीज (मधुमेह)
- मोटापा और उससे जुड़ी स्थितियां (जैसे स्लीप एप्निया, हाई ब्लड प्रेशर)
- कैंसर
- हृदय रोग
- न्यूरोलॉजिकल डिजीज
- मानसिक स्वास्थ्य विकार (डिप्रेशन, एंग्जायटी आदि)
इनके अलावा अधिकारी यह भी देखेंगे कि क्या आवेदक अपने परिवार के बीमार सदस्यों के इलाज का खर्च खुद उठा सकता है या नहीं।
🔹 अब वीजा इंटरव्यू में क्या पूछा जाएगा
पहले अमेरिकी वीजा प्रक्रिया में केवल संक्रामक बीमारियों जैसे TB या HIV की जांच की जाती थी।
लेकिन अमेरिका वीजा नियम 2025 के बाद अब वीजा इंटरव्यू में निम्नलिखित सवाल पूछे जा सकते हैं:
- क्या आपकी बीमारी का इलाज लंबा और महंगा है?
- क्या आप बिना सरकारी सहायता के इलाज करा सकते हैं?
- क्या आपके माता-पिता या बच्चे किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित हैं?
- क्या आपकी बीमारी आपके काम पर असर डाल सकती है?
अगर अधिकारी को यह लगता है कि व्यक्ति भविष्य में “पब्लिक चार्ज” बन सकता है, तो उसका वीजा अस्वीकृत कर दिया जाएगा।
🔹 वकीलों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
इमिग्रेशन वकील चार्ल्स व्हीलर ने कहा कि वीजा अधिकारी स्वास्थ्य विशेषज्ञ नहीं होते, इसलिए किसी बीमारी की गंभीरता या उसके खर्च का सटीक आकलन करना मुश्किल है।
वहीं सोफिया जेनोवेस (जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी) का कहना है कि “डायबिटीज या हार्ट प्रॉब्लम किसी को भी हो सकते हैं। अब अगर इन बीमारियों के कारण लोगों को वीजा न मिले, तो यह नाइंसाफी है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि इस नीति से इंटरव्यू प्रक्रिया जटिल हो जाएगी और कई योग्य आवेदकों के सपने टूट जाएंगे।
🔹 ट्रम्प प्रशासन की नीति की वापसी
दरअसल, यह नीति नई नहीं है। 2019 में ट्रम्प प्रशासन ने “पब्लिक चार्ज” नियम लागू किया था, जिसमें कहा गया था कि केवल वही लोग अमेरिका आ सकेंगे जो समाज में योगदान दें, न कि बोझ बनें।
अब 2025 में यह नीति और सख्त रूप में वापस आई है। इसका असर लाखों अप्रवासियों पर पड़ेगा — खासकर उन पर जो किसी न किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित हैं।
🔹 अमेरिका वीजा नियम 2025 के प्रभाव
1️⃣ वीजा रिजेक्शन दर में 30% तक बढ़ोतरी
भारत जैसे देशों के लिए यह बदलाव बड़ी चिंता है।
हर साल लगभग 1 लाख भारतीय ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते हैं, जिनमें से 70% आईटी और हेल्थ सेक्टर से होते हैं।
अमेरिका वीजा नियम 2025 के लागू होने के बाद इन आवेदनों की अस्वीकृति दर 20–30% तक बढ़ सकती है।
2️⃣ स्वास्थ्य सेवाओं से दूर रहेंगे अप्रवासी
2019 के पब्लिक चार्ज नियम के दौरान हर 7 में से 1 अप्रवासी परिवार ने Medicaid, SNAP या अन्य सरकारी लाभ छोड़ दिए थे।
अब 2025 में फिर वही डर लौट सकता है — लोग अपनी बीमारी छिपाएंगे, इलाज से बचेंगे, जिससे स्वास्थ्य जोखिम और बढ़ेंगे।
3️⃣ बच्चों और महिलाओं पर असर
अमेरिका वीजा नियम 2025 के तहत परिवार के सभी सदस्यों की हेल्थ हिस्ट्री मांगी जाएगी।
इससे अप्रवासी माता-पिता अपने अमेरिकी नागरिक बच्चों को भी सरकारी सहायता लेने से रोक सकते हैं।
गर्भवती महिलाएं और क्रॉनिक मरीज आवश्यक इलाज से बच सकते हैं, जिससे मातृ और शिशु मृत्यु दर बढ़ने का खतरा रहेगा।
4️⃣ अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर असर
अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में बड़ी संख्या में भारतीय और एशियाई प्रोफेशनल्स हैं।
अगर स्वास्थ्य कारणों से उनके वीजा रिजेक्ट होते हैं, तो अमेरिका को कुशल कार्यबल की कमी झेलनी पड़ सकती है।
हालांकि प्रशासन का तर्क है कि इससे सरकारी खर्च घटेगा, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर नुकसानदायक होगा।
🔹 भारत पर सबसे बड़ा असर
भारत को “डायबिटीज कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड” कहा जाता है।
अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज फेडरेशन (IDF) के मुताबिक:
- भारत में 2024 तक 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं।
- 2045 तक यह संख्या 13.4 करोड़ तक पहुंच सकती है।
इसलिए भारत के वे युवा और पेशेवर जो अमेरिका में नौकरी या स्थायी निवास (Green Card) का सपना देखते हैं, उनके लिए अमेरिका वीजा नियम 2025 एक बड़ी रुकावट साबित हो सकता है।
🔹 निष्कर्ष: स्वास्थ्य बन गया वीजा का नया पैमाना
अब तक वीजा देने में शिक्षा, नौकरी और आय मुख्य मापदंड हुआ करते थे,
लेकिन अमेरिका वीजा नियम 2025 के लागू होने के बाद “स्वास्थ्य स्थिति” सबसे अहम कसौटी बन गई है।
डायबिटीज, मोटापा या कैंसर जैसी बीमारियों को अब केवल व्यक्तिगत नहीं,
बल्कि “राष्ट्रीय आर्थिक बोझ” के रूप में देखा जा रहा है।
यह कदम अमेरिका के स्वास्थ्य बजट को राहत दे सकता है,
लेकिन मानवीय दृष्टि से यह लाखों लोगों के सपनों और परिवारों को प्रभावित करेगा।
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