अविमुक्तेश्वरानंद का योगी को 40 दिन का अल्टीमेटम , मीडिया रिपोर्ट्स में बयान बना चर्चा का विषय
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 40 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से “हिंदू होने का प्रमाण” देने की मांग की है। इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।
माघ मेले के घटनाक्रम से जुड़ा मामला
अविमुक्तेश्वरानंद का योगी को 40 दिन का अल्टीमेटम Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा विवाद माघ मेले के दौरान हुए एक घटनाक्रम से जुड़ा है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि प्रयागराज में शंकराचार्य से उनकी पहचान और पद से जुड़े प्रमाण मांगे गए थे। बाद में उन्होंने यह प्रमाण प्रस्तुत किया, जिसे स्वीकार भी किया गया। हालांकि, इसी मुद्दे को लेकर शंकराचार्य ने नाराज़गी जाहिर की थी।
वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस और तीखा बयान
Jansatta के अनुसार, माघ मेला छोड़ने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार पर सवाल उठाए। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि शंकराचार्य ने यह तर्क दिया कि जब उनसे प्रमाण मांगा गया, तो अब मुख्यमंत्री से भी धार्मिक आचरण से जुड़ा प्रमाण मांगा जाना चाहिए।
मीडिया में सामने आई मुख्य मांगें
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री के सामने कुछ शर्तें रखी हैं।
Times of India की खबर में बताया गया है कि उन्होंने गो-माता को “राज्य माता” घोषित करने की मांग की है।
वहीं, Jansatta की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि उन्होंने गोहत्या और गो-मांस निर्यात पर पूरी तरह रोक लगाने की बात कही है।
उनका कहना है कि ये मांगें धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ी हैं और सरकार को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
40 दिनों की समयसीमा क्यों अहम
मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री को 40 दिनों का समय दिया है। उनके अनुसार, इस अवधि में सरकार अपने कदम स्पष्ट कर सकती है। खबरों में यह भी कहा गया है कि यदि तय समय में कार्रवाई नहीं होती, तो वे मुख्यमंत्री को “ढोंगी” और “दिखावे का हिंदू” कहकर संबोधित करेंगे।
राजनीतिक और धार्मिक प्रतिक्रियाएं
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बयान ने राजनीतिक और धार्मिक दोनों क्षेत्रों में हलचल मचा दी है। कुछ लोग इसे धार्मिक भावना से जुड़ा मामला मान रहे हैं। वहीं, अन्य विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान राजनीति से भी जुड़ा हो सकता है। इसलिए यह विवाद केवल धार्मिक दायरे तक सीमित नहीं दिखता।
निष्कर्ष
अविमुक्तेश्वरानंद का योगी को 40 दिन का अल्टीमेटम : कुल मिलाकर, मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया यह मामला धर्म और राजनीति के संबंधों पर नई बहस को जन्म देता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह विवाद बयानबाजी तक सीमित रहता है या किसी नीतिगत फैसले की दिशा में आगे बढ़ता है।

